मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को 235 करोड़ की लागत से बनकर तैयार हुए अत्याधुनिक आलमबाग बस स्टेशन का लोकार्पण किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने लखनऊ से अयोध्या स्वामी नारायण मंदिर छपिया के लिए दो संकल्प सेवाओं को रवाना कर इसका उद्घाटन किया। इसके अलावा 40 नए प्रवर्तन वाहनों को भी मुख्यमंत्री ने फ्लैग ऑफ किया। बसों का संचालन 13 जून से होगा। लखनऊ से दिल्ली और आगरा वाया एक्सप्रेस वे संचालित होने वाली 395 एसी सेवाओं का संचालन प्रथम चरण में किया गया है। तीन दिन में सात सौ बसों का संचालन नए बने इस बस स्टेशन से शुरू करने की तैयारी है।

आलमबाग बस स्टेशन की खासियत - 

235 करोड़ से ज्यादा लागत वाले इस बस स्टेशन का लुक पूरी तरह से एयरपोर्ट जैसा है। इस टर्मिनल पर मॉल के साथ 6 मल्टी स्क्रीन सिनेमाहॉल और 125 कमरों का बजट होटल इसकी विशेषता हैं। बस के साथ यह टर्मिनल यात्रियों को मेट्रो से भी जोड़ेगा। यह यूपी का पहला सबसे हाईटेक बस टर्मिनल होगा जो लोगों को एयरपोर्ट से अनुभव देगा।

 

इस मौके पर आइए जानते हैं देश के अन्य हाईटेक बस टर्मिनल्स के बारे में...

 

103 करोड़ की लागत से बना है चेन्नई मोफुस्सिल बस टर्मिनल - 

एशिया के सबसे बड़े बस टर्मिनस का दर्जा पा चुका के चेन्नई मोफुस्सिल बस टर्मिनस का उद्घाटन नवंबर 2002 में जयललिता ने किया था। यह बस टर्मिनस1.5 एकड़ में फैला है और इसको बनाने में तकरीबन 103 करोड़ का खर्च आया था।

 

ये है खासियत -

 

एक दिन में यहां 3000 बसें आती-जाती हैं, जिनमें 2.5 लाख यात्री सफर करते हैं। यहां तीन होटल और तीन फूड स्टॉल हैं। यहां आरओ प्यूरिफाइड ड्रिंकिंग वॉटर फ्री में उपलब्ध करवाया जाता है। 24 घंटे मेडिकल सेवाओं के अलावा फ्री वाई-फाई इंटरनेट, सुपरमार्केट, ट्रैवल एजेंट ऑफिस आदि जैसी सुविधाएं मौजूद हैं।

114 करोड़ की लागत से तैयार हुआ है वड़ोदरा सेंट्रल बस स्टेशन - 

 

2.4 लाख स्क्वायर फीट एरिया में फैले इस पांच मंजिला बस स्टेशन को बनाने में गुजरात स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन को 114 करोड़ रुपए खर्च करने पड़े थे। वेद ट्रांसक्यूब प्लाजा नाम से मशहूर इस बस टर्मिनल का उद्धाटन फरवरी 2014 में नरेंद्र मोदी ने किया था।

 

 

ये है खासियत - 

 

इस बस टर्मिनल में 400 रिटेल शॉप, 22 आउटलेट्स वाला फूडकोर्ट, पीवीआर फिल्म्स का 7 स्क्रीन मल्टीप्लेक्स सिनेमा हॉल और 100 कमरों का बजट होटल मौजूद है। यहां हर रोज तकरीबन 800 बसों का आना-जाना होता है और इनसे लगभग 30 हजार मुसाफिर सफर करते हैं। यहां रात में रुकने वाले यात्रियों को सस्ते दरों पर किराये से मैट्रेस मिलते हैं। साथ ही फ्री नैपकिन और साबुन की व्यवस्था है। सामान ले जाने के लिए एयरपोर्ट की तरह यात्रियों को ट्रॉली मिलती हैं।

अपनी प्रतिक्रिया दें

महत्वपूर्ण सूचना

भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।

और भी पढ़ें..

विज्ञापन

फोटो-फीचर

हिंदी ई-न्यूज़ से जुड़े