रायपुर के अमलीडीह स्थित एक फ्लैट से 5.60 करोड़ के नकली नोट जब्ती के मामले में रोज नई बातें सामने आ रही हैं। पुलिस की तफ्तीश में साफ हुआ है कि जेल भेजे गए दंपती निखिल सिंह, पूनम अग्रवाल ने मल्टीनेशनल कंपनियों के सीएसआर मद की रकम को हथियाने के लिए न केवल कंपनी बल्कि एनजीओ के ब्रोकर्स को झांसे में लेकर उनसे असली नोट लेकर करोड़ों के नकली नोट थमाए हैं। जब तक ब्रोकर्स को नकली नोट होने का पता चला, काफी देर हो चुकी थी।

पुलिस को आशंका है कि ब्रोकर्स ने दो नंबर के पैसों को एक नंबर (सफेद) करने के चक्कर में नकली नोट बाजार में खपाए हैं। फिलहाल पुलिस ने धमतरी के एक एनजीओ संचालक को निशाने पर लेते हुए उसे पूछताछ के लिए तलब किया है। इधर, मामले की जांच के लिए एनआइए की टीम के रायपुर आने की खबर से खलबली मची हुई है। एनआइए ने पुलिस अफसरों को पत्र लिखकर पूरी डिटेल तलब करने के साथ जल्द ही आने के संकेत दिए हैं। एनआइए को इस केस में अब तक की गई कार्रवाई की पूरी जानकारी बंद लिफाफे में भेज दी गई है। अफसरों ने इसकी पुष्टि की है।

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