बीजेपी के खिलाफ महागठबंधन की उम्मीदों को एक बार फिर से झटका लगा है. उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने इशारों ही इशारों में कहा है कि वो 2019 में पीएम उम्मीदवार के तौर पर राहुल गांधी को नहीं देखना चाहते हैं.

 

दरअसल सोमवार को डीएमके अध्‍यक्ष स्टालिन ने राहुल गांधी को विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्‍मीदवार बनाने की वकालत की थी. उन्‍होंने कहा, 'मैं पीएम पद के लिए राहुल का नाम देता हूं. राहुल फासीवादी ताकतों को रोक सकते हैं.'

 

मंगलवार को अखिलेश यादव ने स्टालिन के बयान पर कहा कि उनकी राय गंठबंधन की राय नहीं हो सकती. उन्होंने कहा, ''लोग बीजेपी से खुश नहीं है, तेलंगाना के सीएम नायडू, ममता जी और शरद पवार ने सारे नेताओं को एक साथ लेकर गठबंधन बनाने की कोशिश की है. लेकिन अगर कोई अपनी राय दे रहा है तो वो गठबंधन की राय नहीं हो सकती है.''

 

इससे पहले तृणमूल कांग्रेस ने भी एम के स्टालिन के बयान पर असहमति जताई थी. तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि इस तरह का बयान अपरिपक्व फैसला होगा, इसलिए लोकसभा चुनाव के रिजल्ट के बाद ही पीएम पद के उम्मीदवार का फैसला होगा.

 

तृणमूल कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि लोक सभा चुनाव परिणाम के बाद विपक्षी पार्टियों द्वारा चर्चा के बाद ही प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के नाम पर फैसला लिया जाना चाहिए. किसी भी तरह के एकपक्षीय फैसले से गलत संदेश जाएगा.

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