केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा है कि आयुष्मान भारत योजना के तहत देश के 10 करोड़ परिवारों के 50 करोड़ लोगों को लाभ होगा। इसके तहत समाज के गरीब वर्गों को 5 लाख रुपए तक का चिकित्सा उपचार नि:शुल्क उपलब्ध करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश भर के 1.50 लाख स्वास्थ्य उप केंद्रों को बीमारियों की शीघ्र पहचान के लिए वैलनैस केंद्रों में परिवर्तित किया जाएगा। इससे 30 वर्ष की आयु से प्रत्येक व्यक्ति की सार्वभौमिक स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित होगी और देशभर में बीमारियों में भी कमी आएगी। 


राज्य में प्रस्तावित मैडीकल विश्वविद्यालय खोलने के प्रयासों की सराहना की
इस योजना में सभी प्रमुख बीमारियों का उपचार कैशलैस और पेपरलैस तरीके से किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने यह जानकारी यहां आयुष्मान भारत योजना के तहत समझौते पर हस्ताक्षर करने के अवसर पर आयोजित कार्यशाला के दौरान कही। हिमाचल प्रदेश के अलावा इस योजना पर उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ की तरफ से हस्ताक्षर किए गए। नड्डा ने कहा कि देशभर के लोगों को उनके घरों के नजदीक बेहतर स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए 20 एम्स खोले जा रहे हैं जिनमें से हिमाचल प्रदेश भी एक है। उन्होंने राज्य में प्रस्तावित मैडीकल विश्वविद्यालय खोलने के प्रयासों की सराहना की।

इस कारण जब पूरा विश्व चिंतित रहा
उन्होंने कहा कि चिकित्सा जगत से जुड़े विशेषज्ञों व आम लोगों के बीच संवाद की बड़ी कमी है। यही नहीं चिकित्सकों को भी अपनी क्षमता की सही जानकारी नहीं हैं, बेशक वे लोगों को बेहतर उपचार सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दशकों के दौरान विश्व के कुछ देशों में इबोला, इंफ्लूएंजा, जीका वायरस और स्वाइन फ्लू जैसी महामारियों ने अचानक जन्म लिया और देशों की आर्थिकी व सामाजिक परिवेश को प्रभावित किया। इस कारण जब पूरा विश्व चिंतित रहा तो भारत के चिकित्सा विशेषज्ञों ने इसके निदान की तकनीक को खोज निकाला। हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की विस्तृत जानकारी दी।

10 करोड़ की व्यवस्था की गई
उन्होंने कहा कि प्रदेश में पहली बार स्वास्थ्य राहत कोष बनाकर उसमें 10 करोड़ की व्यवस्था की गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव प्रीति सुडान, नीति आयोग (स्वास्थ्य) के सदस्य डा. वी.के. पॉल, राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजैंसी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी डा. इन्दु भूषण और प्रधान सचिव स्वास्थ्य प्रबोध सक्सैना ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए। शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज, सांसद वीरेंद्र कश्यप, विधायक नरेंद्र बरागटा, मुख्य सचिव विनित चौधरी, नगर निगम शिमला की महापौर कुसुम सदरेट, निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डा. बलदेव शर्मा व आई.जी.एम.सी. के प्राचार्य डा. रवि शर्मा सहित अन्य गण्यमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे

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