कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को सुहागिन महिलाएं अपने सुहाग की लंबी आयु के लिए करवा चौथ का व्रत रखती हैं। इस व्रत में भगवान शिव, माता पार्वती, श्री गणेश, श्री कार्तिकेय और चंद्रमा की पूजा का विधान है। करवा चौथ के दिन तारों की छाया में स्नान करके यह संकल्प मंत्र बोल कर करवाचौथ व्रत का आरंभ करें :  पति, पुत्र तथा पौत्र के सुख एवं सौभाग्य की कामना की इच्छा का संकल्प लेकर निर्जल व्रत रखें। भगवान शिव, पार्वती, गणेश एवं कार्तिकेय की प्रतिमा या चित्र का पूजन करें। बाजार में मिलने वाला करवाचौथ का चित्र या कैलेंडर पूजा स्थान पर लगा लें। चंद्रोदय पर अर्घ्य दें। पूजा के बाद तांबे या मिट्टी के करवे में चावल, उड़द की दाल भरें। सुहाग की सामग्री में कंघी, सिंदूर, चूडिय़ां, रिबन तथा रुपए आदि रख कर दान करें। सास के चरण छू कर आशीर्वाद लें।

करवा चौथ व्रत पूजा के मंत्र 

पार्वतीजी का मंत्र - ॐ शिवायै नमः

शिव का मंत्र - ॐ नमः शिवाय

स्वामी कार्तिकेय का मंत्र - ॐ षण्मुखाय नमः 

श्रीगणेश का मंत्र - ॐ गणेशाय नमः

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