माघ माह की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहते हैं। इस दिन मौन रहकर गंगा स्नान करना चाहिए। यदि यह अमावस्या सोमवार के दिन हो तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। अनेक लोग समूचा माघ प्रयाग में संगम तट पर कुटिया बनाकर रहते हैं तथा नित्य त्रिवेणी स्नान करते हैं। इस बार की मौनी अमावस्या तो कुंभ मेले के दौरान ही पड़ रही है। प्रयागराज में चल रहे कुंभ मेले में इस अवसर पर तीन करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु स्नान के लिए पहुँच रहे हैं जिसके लिए प्रशासन ने तगड़े प्रबंध किये हैं। माना जाता है कि इस दिन पवित्र संगम पर देवी-देवताओं का वास होता है इसलिए हर श्रद्धालु का प्रयास रहता है कि मौनी अमावस्या को एक बार पवित्र संगम में डुबकी लगा ले। प्रयागराज में चल रहे कुंभ मेले के अलावा सोमवती अमावस्या के दिन लोग हरिद्वार, वाराणसी और गंगासागर में भी डुबकी लगाएंगे।इस बार की मौनी अमावस्या इस मायने में खास है कि 12 वर्षों बाद ऐसा हो रहा है जब मौनी अमावस्या कुंभ के दौरान पड़ रही है और इस दिन सोमवार भी है। इस दिन पवित्र स्नान करने और दान आदि करने से समस्त पापों का नाश होता है और पुण्य मिलता है साथ ही जो लोग समस्त पीड़ाओं का शमन चाहते हैं उन्हें भी इस दिन पवित्र स्नान करना चाहिए और गरीबों तथा जरूरतमंदों को दान दक्षिणा देनी चाहिए। मौनी अमावस्या कुम्भ में दान करने से अनिष्ट ग्रहों की पीड़ा का शमन होता है और पूरे वर्ष घर में सुख शांति रहती है। शास्त्रों में मौनी अमावस्या के विशेष पुण्यकाल पर स्वयं का उद्धार तथा पितरों को तारने के लिए संगम के अक्षय क्षेत्र में दान का विशेष विधान भी वर्णित है।

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