मां शक्ति स्तुति महापर्व चैत्र शुक्लपक्ष प्रतिप्रदा से नवरात्र एवं भारतीय संस्कृति, सभ्यता का प्रतीक नवसंवत्सर शनिवार से आरंभ हो गया है। घरों और मंदिरों में घट स्थापित कर मां दुर्गा का पूजन-अर्चन शुरू हो गया है। यम-नियम से मां भगवती की स्तुति करने पर साधकों को यश-कीर्ति, आर्थिक संपन्नता के साथ शारीरिक व मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलेगी। शनिवार की सुबह 6.48 बजे पंचक समाप्त हुआ। पंचक खत्म होने के बाद घट स्थापना का उचित मुहूर्त सुबह 6.52 से आरंभ हुआ। प्रतिप्रदा तिथि दोपहर 2.36 बजे तक है। ऐसी स्थिति में 2.36 बजे तक घट स्थापित करके मां शक्ति की स्तुति की जा सकती है। इस दौरान शनि, केतु व गुरु का संचरण धनु राशि में होगा। साथ ही अश्विनी नक्षत्र का विशेष संयोग मिल रहा है। पहले दिन मां के शैलपुत्री स्वरूप का पूजन किया जा रहा हैनवरात्रों का ऋतुओं की दृष्टि से विशेष महत्व माना गया है। ऋतु के क्रम में आराधना, उपासना, उपवास आदि करने से मनुष्य को शारीरिक व मानसिक शक्ति मिलती है। वासंतिक एवं शारदीय नवरात्र पर ऋतुओं का परिवर्तन होता है, जिसका वातावरण पर असर पड़ता है। इसमें नवचंडी, सहस्त्रचंडी, सतचंडी, लक्ष्यचंडी यज्ञ एवं धार्मिक अनुष्ठान अत्यंत कल्याणकारी होता है, क्योंकि साधक का अध्यात्म के साथ प्रकृति से जुड़ाव भी होता है।ज्योतिर्विद आशुतोष वार्ष्‍णेय बताते हैं कि मां शक्ति की उपासना में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना अनिवार्य होता है। दुर्गा सप्तशती में 13 अध्याय हैं। अगर कोई इसे पूरा नहीं कर सकता तो पंचम और 11 वां अध्याय का पाठ करके मां भगवती की स्तुति करें। साधक नौ दिन का व्रत रखने में असमर्थ हैं तो नवरात्र की प्रतिपदा, सप्तमी, अष्टमी और नवमी का व्रत रख सकते हैं।विश्व पुरोहित परिषद के अध्यक्ष डॉ. बिपिन पांडेय बताते हैं कि कलश स्थापना के बिना मां भगवती की उपासना अधूरी रहती है। व्रती साधकों के साथ हर भक्त को पूजन स्थल पर अच्छे कार्य का संकल्प लेकर कलश की स्थापना करनी चाहिए। कलश की स्थापना किसी अच्छे कार्य का संकल्प लेकर करना चाहिए, तभी व्रत पूर्ण होता है।

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