धनतेरस से दीवाली के त्योहार की शुरुआत हो जाती है। दीवाली से 2 दिन पहले धनतेरस मनाया जाता है। इस दिन धन के देवता कुबेर और देवताओं के चिकित्सक धन्वंतरि महाराज की पूजा होती है। यह दिन खरीददारी के लिए बहुत शुभ माना जाता है। लोग सोना, चांदी, बर्तन आदि सामान खरीदते और पूजा करते हैं।  


जानें, धनतेरस पर पूजा का शुभ मुहूर्त
इस बार धन त्रयोदशी का आरंभ 4 नवंबर की मध्यरात्रि के बाद 1 बजकर 24 मिनट पर होगा और 5 तारीख की रात 11 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। इस दिन पूजा की विशेष महत्व है। 

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पूजा करने की मान्यता
धनतेरस के दिन पूजा करने की मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा करने से इंसान यम द्वारा दी जाने वाली यातनाओं से मुक्त हो जाता है। इसी वजह से शाम के समय दीपदान किया जाता है और माना जाता है कि इससे परिवार के सदस्यों की अकाल मृत्यु नहीं होती। 

धनतेरस से भाई दूज तक 5 दिन दीया जलाने की वजह 
इस दिन दीया जलाने का तरीके कुछ अलग होता है। नई खरीदी हुई वस्तुओं में थोड़ा-सा गुड़ या मिठाई भरकर घर लाएं और लक्ष्मी-कुबेर की पूजा करें। इसके अलावा धनतेरस से भाई दूज तक 5 दिन दीया जलाने का भी खास महत्व है। माना जाता है कि यम का दीया जलाने से यमराज द्वारा दी जाने वाली यातनाओं से पारिवारिक सदस्मुयों को मुक्ति मिल जाती है। 

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धनतेरस पर दीया जलाने का तरीका
यम का दीया नए नहीं बल्कि पुराने इस्तेमाल किए हुए दीए में जलाया जाता है। परिवार के सभी सदस्यों के घर आने के बाद यह दीया जलाया जाता है। दीए में रूई की बत्ती और सरसों का तेल डालकर घर से बाहर दक्षिण की ओर मुख कर नाली या कूड़े के ढेर के पास रख दें। जल चढ़ाकर बना दीपक को देखे घर आ जाए। 

 

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