ढऩे और लिखने की कोई उम्र नहीं होती ऐसा साबित करके दिखाया है 98 वर्षीय राजकुमार वैश्य ने। अपनी रिटायरमेंट के चार दशक बाद राजकुमार ने इस उम्र में न केवल अपनी पढ़ाई पूरी की बल्कि सामान्य छात्रों के साथ बैठकर परीक्षा देकर एमए का कोर्स पूरा किया। उन्होंने 83 साल पहले मैट्रिक की थी। 2 साल पहले जब राजकुमार ने नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र से स्नातकोत्तर में नामांकन के लिए आवेदन किया था तो विवि प्रशासन के अधिकारी खुद उनके घर दाखिला लेने गए राजकुमार ने बताया कि आखिरकार, मैंने अपना सपना पूरा कर लिया है। अब मैं परास्नातक हूं। मैंने इस उम्र में यह साबित करने का निर्णय लिया था। कोई भी अपना सपना पूरा कर सकता है और कुछ भी हासिल कर सकता है। मैं एक उदाहरण बन गया हूं। उन्होंने कहा कि वह युवाओं को संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्हें कभी भी हार नहीं माननी चाहिए, मौका हर वक्त रहता है, केवल खुद पर विश्वास होना चाहिए। उन्होंने माना कि इस उम्र में विद्यार्थी की दिनचर्या का निर्वहन आसान नहीं था। राजकुमार ने बताया कि सुबह जल्दी उठ कर परीक्षा की तैयारी करना मेरे लिए काफी मुश्किल था।

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